हम अक्सर सोचते हैं कि हमारी स्किन का रंग सिर्फ जेनेटिक्स का फैसला है। लेकिन एक रिसर्च में लोगों की स्किन का रंग एक खास मशीन से नापा गया और सिर्फ 6 हफ्ते तक खाने में कुछ बदलाव किए गए। रिजल्ट हैरान करने वाला था - बिना किसी क्रीम या महंगे ट्रीटमेंट के उनकी स्किन की रंगत में सच में बदलाव दिखा।
हम यही गलती करते हैं। ग्लो के लिए बाहर से फेयरनेस क्रीम, सीरम और महंगे ट्रीटमेंट लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि क्रीम सिर्फ स्किन की सबसे ऊपर वाली परत तक ही पहुंच पाती है। जो चमक और रंगत बाहर दिखती है, वह असल में अंदर से बनती है।
खाना कैसे रंगत बन जाता है?
जब आप रंगीन फल और सब्जियां खाते हैं तो उनमें नेचुरल पिगमेंट्स होते हैं, जिन्हें *कैरोटिनॉइड्स* कहते हैं। पेट में पचने के बाद ये कैरोटिनॉइड्स खून में जाते हैं और धीरे-धीरे स्किन की परतों में जमा होने लगते हैं। यानी आपकी स्किन वही टोन लेने लगती है जो आप खाते हैं। आयुर्वेद में हजारों साल पहले ही कहा गया है - त्वचा की कांति रस धातु से बनती है, मतलब जो खाना पचेगा उसी का असर स्किन तक पहुंचेगा।
लेकिन एक बात समझना जरूरी है। चेहरे का फीकापन सिर्फ खाने की कमी से नहीं होता। थायराइड, खून की कमी, Vitamin B12, Vitamin D की कमी या लिवर का ठीक से काम न करना भी इसका कारण हो सकता है। अगर आपको बहुत ज्यादा थकान, बाल झड़ना या अन्य लक्षण दिख रहे हैं तो सिर्फ डाइट पर निर्भर न रहें, डॉक्टर से मिलकर जांच जरूर कराएं।
स्किन के ग्लो के लिए 5 सबसे असरदार चीजें
1. टमाटर - लाइकोपीन का पावरहाउस
टमाटर में लाइकोपीन नाम का लाल पिगमेंट होता है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में हुई एक रैंडमाइज्ड ट्रायल में 12 हफ्ते तक लोगों को रोज टमाटर पेस्ट दिया गया। बाद में स्किन बायोप्सी में देखा गया कि धूप से होने वाला डैमेज उनमें कम था और कोलेजन को तोड़ने वाला MMP-1 एंजाइम भी कम एक्टिव था।
जरूरी टिप: लाइकोपीन कच्चे टमाटर से ज्यादा पके हुए टमाटर से मिलता है। जब आप टमाटर को हल्की आंच पर थोड़े से तेल के साथ पकाते हैं तो इसका अब्जॉर्प्शन 2 से 3 गुना बढ़ जाता है। इसलिए इसे सब्जी, चटनी या सूप में पका कर खाएं। अगर आपको एसिडिटी या सीने में जलन रहती है तो खाली पेट या बहुत ज्यादा मात्रा में न खाएं, क्योंकि यह हल्का एसिडिक होता है।
2. गाजर और शकरकंदी - बीटा कैरोटीन से हेल्दी रंगत
गाजर और शकरकंदी में नारंगी रंग का बीटा कैरोटीन होता है। शरीर में जाकर इसका एक हिस्सा Vitamin A में बदलता है, जो नई स्किन सेल्स बनाने के लिए बहुत जरूरी है। बचा हुआ हिस्सा स्किन की परतों में जमा हो जाता है और चेहरे को एक हल्का वार्म, हेल्दी ग्लो देता है। यह पीलेपन वाला ग्लो नहीं, बल्कि हेल्थ वाला ग्लो होता है।
रोज कम से कम एक गाजर जरूर खाएं। सीजन में हफ्ते में 3-4 बार शकरकंदी उबाल कर खा सकते हैं। बीटा कैरोटीन फैट-सॉल्युबल है, यानी बिना हेल्दी फैट के यह अच्छे से अब्जॉर्ब नहीं होता। इसलिए इसे थोड़े से घी या ऑलिव ऑयल के साथ लें।
3. कद्दू के बीज - जिंक से रिपेयर
कद्दू के बीज यानी Pumpkin Seeds जिंक का सबसे अच्छा शाकाहारी सोर्स हैं। जिंक स्किन के लिए दो काम करता है। पहला, यह स्किन की रिपेयर और हीलिंग को तेज करता है। दूसरा, यह ऑयल ग्लैंड्स को कंट्रोल में रखता है।
डर्मेटोलॉजिक थेरेपी जर्नल में एक मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि जिन लोगों को बार-बार पिंपल्स की समस्या होती है, उनके खून में अक्सर जिंक का लेवल कम होता है। इसका मतलब यह नहीं कि जिंक पिंपल्स की दवा है, लेकिन कमी होने पर उसे पूरा करना जरूरी है।
रोज एक बड़ी चम्मच, लगभग 10-15 ग्राम भुने हुए कद्दू के बीज काफी हैं। ज्यादा मत खाइए, क्योंकि इसमें कैलोरी ज्यादा होती है और वजन बढ़ सकता है।
4. दही - गट और स्किन का कनेक्शन
अक्सर कहा जाता है कि दूध से पिंपल्स बढ़ते हैं, जो कुछ लोगों के लिए सच हो सकता है। लेकिन दही दूध जैसा नहीं है। दही में गुड बैक्टीरिया यानी प्रोबायोटिक्स होते हैं जो आपके गट यानी आंतों को सुधारते हैं। और आज साइंस इसे *गट-स्किन एक्सिस* कहती है - पेट का सीधा रिश्ता स्किन से होता है।
अगर आपका पेट साफ नहीं रहेगा तो स्किन पर उसका असर दिखेगा ही। रोज दोपहर में एक कटोरी ताजा, घर का जमा हुआ दही लें। दोपहर का समय इसके लिए सबसे अच्छा माना जाता है। बाजार वाला मीठा, फ्लेवर्ड दही न लें, उसमें चीनी और फ्लेवर ज्यादा होते हैं जो फायदा कम और नुकसान ज्यादा करते हैं।
5. अंडा - स्किन का बिल्डिंग ब्लॉक
हमारी पूरी स्किन प्रोटीन से बनी है। कोलेजन भी प्रोटीन है, केराटिन भी और इलास्टिन भी। शरीर का नियम है कि जब प्रोटीन कम होता है तो वह पहले दिल, लिवर और मसल्स को प्रोटीन देता है। स्किन, बाल और नाखून का नंबर सबसे आखिर में आता है। इसलिए प्रोटीन की कमी का असर सबसे पहले बाल झड़ने, नाखून टूटने और स्किन के ढीली-बेजान लगने के रूप में दिखता है।
अंडा एक कम्पलीट प्रोटीन है। इसमें 9 के 9 एसेंशियल अमीनो एसिड्स होते हैं और साथ में बायोटिन भी होता है। अंडे का प्रोटीन हाईली बायोएवेलेबल है, यानी शरीर इसे बहुत आसानी से अब्जॉर्ब कर लेता है। अपनी फिजिकल एक्टिविटी के हिसाब से रोज 2 से 4 अंडे ले सकते हैं। हमेशा पूरा अंडा खाएं, सिर्फ सफेद नहीं। क्योंकि बायोटिन और विटामिन्स पीले वाले हिस्से में ही होते हैं।

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