चेहरे की झाइयां और हाइपरपिगमेंटेशन क्यों बढ़ती है? 90% लोग करते हैं ये 5 गलतियां

 


दोस्तों छाइयां, हाइपर पिगमेंटेशन, मेलाज्मा एक ऐसी समस्या है जो हर उम्र के व्यक्ति को परेशान करती है। जब चेहरे पर छाइयां होती हैं, डार्क सर्कल होते हैं, काले धब्बे होते हैं, चेहरे का रंग बदल जाता है, कहीं हाइपो पिगमेंटेशन होती है तो कहीं हाइपर पिगमेंटेशन होती है, तो चेहरा पैची सा लगता है और बड़ा अजीब सा लगता है। 


पेशेंट का मनोबल कम हो जाता है, सेल्फ एस्टीम कम हो जाती है। महिला हो या पुरुष हर व्यक्ति इससे परेशान होता है। आप सब जानते हैं कि मेलाज्मा पिगमेंटेशन महिलाओं में ज्यादा असर डालती है, ज्यादा नजर आती है पुरुषों की अपेक्षा। यह किसी भी उम्र में हो सकती है, उन लोगों को यह ज्यादा होती है जिनकी स्किन थोड़ा डार्क कलर की होती है।


मेलाज्मा और पिगमेंटेशन होता क्यों है?

जब हमारी स्किन पर UV Rays का प्रभाव ज्यादा होता है यानी सन एक्सपोजर ज्यादा होता है, 10 से 4:00 बजे के समय के बीच में UV Rays ज्यादा निकलती हैं और UV Rays मेलानोसाइट्स को एक्टिवेट करती हैं टू प्रोड्यूस मोर मेलेनिन।

इसके अलावा हार्मोनल कारण होते हैं, जेनेटिक कारण होता है, स्ट्रेस होता है, लाइफ स्टाइल होता है, कुछ सिस्टमिक डिसऑर्डर होते हैं और कुछ दवाइयों के प्रभाव की वजह से भी मेलाज्मा या हाइपर पिगमेंटेशन होती है।

आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे उन पांच गलतियों के बारे में जिनके करने की वजह से मेलाज्मा और हाइपर पिगमेंटेशन बढ़ जाती है उन गलतियों को जानने से पहले आपको एक बार स्किन का स्ट्रक्चर समझना जरूरी है।


हमारी स्किन का स्ट्रक्चर कैसा होता है?

ऊपर की जो लेयर है उसे हम एपिडर्मिस बोलते हैं जो हमें बाहर से दिखाई देती है। उसके नीचे डर्मिस होती है, डर्मिस डीप लेयर होती है स्किन की। इन दोनों के बीच में मेलानोसाइट सेल्स होती हैं। इन सेल्स से मेलेनिन नाम का पिगमेंट बनता है जो हमारी स्किन के कलर के लिए उत्तरदायी है। अगर यह मेलेनिन ज्यादा बनता है तो स्किन का कलर डार्क होना शुरू हो जाता है।

हाइपर पिगमेंटेशन और मेलाज्मा के अंदर कहीं स्किन का कलर डार्क हो जाता है तो कहीं लाइट हो जाता है जिससे स्किन पैची नजर आती है। उसके नीचे सिबेसियस ग्लैंड्स होती हैं, ये मसल्स होते हैं, फैट होती है। तो इस तरह से सारा का सारा यह स्किन और हेयर का स्ट्रक्चर होता है।


तो यदि हम चाहते हैं हमारा मेलाज्मा या पिगमेंटेशन ना बढ़े तो हमें पांच गलतियां बिल्कुल नहीं करनी हैं।


गलती नंबर 1: बार-बार चेहरा धोना (Over Cleansing of Face)

पहली गलती है ओवर क्लींजिंग ऑफ द फेस या स्किन। जब हम बार-बार चेहरे को किसी भी फेस वॉश से चाहे वो कितना ही अच्छा है, धोते हैं तो स्किन का नेचुरल फ्लोरा खराब हो जाता है।

हमारी स्किन का pH 5.5 के आसपास होता है और जब हम बार-बार कोई भी फेस वॉश या सोप का इस्तेमाल करते हैं तो स्किन के ऊपर से मॉइश्चर निकल जाता है और स्किन के जो हेल्दी बैक्टीरिया हैं वो बार-बार धोने से खराब हो जाते हैं। क्योंकि बहुत सारे जो फेस वॉश हैं और सोप्स हैं उनका pH ज्यादा होता है, कईयों का तो 9-10 pH होता है। ज्यादा अल्कलाइन होने की वजह से अच्छे बैक्टीरिया भी खत्म हो जाते हैं जिससे स्किन का नेचुरल फ्लोरा जो होता है वो खराब हो जाता है और हमारी स्किन के अंदर पिगमेंटेशन और ड्राइनेस की समस्या को बढ़ा देता है।

इसलिए पहली गलती आपने बिल्कुल नहीं करनी, चेहरे को बार-बार धोना नहीं है, ओवर क्लींजिंग नहीं करनी है। दिन में सिर्फ 2 बार ही फेस वॉश करें - सुबह और शाम।


गलती नंबर 2: पिंपल्स और मुहांसों को फोड़ना

दूसरी गलती हम क्या करते हैं कि बहुत सारे लोगों के चेहरे पर फुंसी हो जाती हैं, एक्ने हो जाते हैं, मुहांसे हो जाते हैं, उनको हम प्रिक कर देते हैं, उनको किसी चीज से फोड़ देते हैं जिससे उसकी पस बाहर निकल सके और ब्लैक हेड बाहर निकल सके।

इस प्रोसीजर से मेलानोसाइट्स हाइपर एक्टिव हो जाती हैं और परमानेंटली डीप स्तर तक मेलेनिन चला जाता है और डीप मेलाज्मा शुरू हो जाता है और यह ठीक होना बहुत मुश्किल होता है। इसे पोस्ट इंफ्लेमेटरी हाइपर पिगमेंटेशन (PIH) कहा जाता है।

इसलिए आपको अपनी पिंपल्स को, अपनी फुंसी को प्रिक नहीं करना, फोड़ना नहीं है। उसे अपने आप ठीक होने दें या डॉक्टर की सलाह से दवा लगाएं।


गलती नंबर 3: सनस्क्रीन लोशन को स्किप करना

तीसरी और सबसे बड़ी गलती है स्किपिंग सनस्क्रीन लोशन। आमतौर पर होता क्या है कि लोग सनस्क्रीन लोशन को बार-बार लगाने की बजाय एक या दो बार करते हैं दिन में।

जिससे क्या होता है कि हमारी स्किन को हर दो से तीन घंटे के बाद सनस्क्रीन लोशन की आवश्यकता होती है। जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव होती है अगर उसे आप बार-बार नहीं लगाते तो उसका प्रभाव नहीं आता और आपकी स्किन पर UV Rays काम करके मेलानोसाइट्स की एक्टिविटी को बढ़ा देती हैं जिससे आपकी पिगमेंटेशन बढ़ जाती है, डार्क सर्कल, छाइयां बढ़ जाती हैं।

तो एक तो आपने सनस्क्रीन लोशन को स्किप नहीं करना। यदि आप कहीं बाहर जाते हैं तो आपने हर दो से तीन घंटे के बाद सनस्क्रीन लोशन अपने चेहरे पर और जो एक्सपोज्ड एरिया है वहां पर अप्लाई करना है और उसके साथ-साथ सन प्रोटेक्टिंग फैक्टर उसके अंदर कम से कम SPF 30 होना चाहिए, उससे कम SPF का सनस्क्रीन लोशन आपको काम नहीं करेगा। धूप में निकलने से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं।


गलती नंबर 4: बार-बार स्क्रब और एक्सफोलिएशन करना

चौथी गलती जो अक्सर हम करते हैं वह है एक्सफोलिएशन की। एक्सफोलिएशन अगर बार-बार की जाएगी, स्किन से बार-बार हम डेड स्किन को निकालेंगे तो हमारी स्किन खराब होने का डर होता है और पिगमेंटेशन के बढ़ने के चांसेस होते हैं।

बहुत से लोग रोज-रोज स्क्रब, अप्रीकॉट स्क्रब, अखरोट का स्क्रब या केमिकल एक्सफोलिएंट जैसे AHA, BHA का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इससे स्किन की ऊपरी सुरक्षात्मक परत हट जाती है और स्किन UV Rays के प्रति और ज्यादा सेंसिटिव हो जाती है।

इसीलिए आपको अपनी स्किन की एक्सफोलिएशन बहुत बार-बार नहीं करनी है। हफ्ते में सिर्फ 1 से 2 बार ही हल्के हाथों से एक्सफोलिएशन करें।


गलती नंबर 5: स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल

सबसे अंतिम और पांचवी सबसे खतरनाक गलती जो हम लोग अक्सर करते हैं वो है पोटेंट कॉर्टिकोस्टेरॉइड क्रीम का इस्तेमाल करना।

जितनी भी स्टेरॉयड की क्रीम होती है वो हमारी स्किन को खराब कर देती हैं। मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली गोरे होने की क्रीम, जैसे Betamethasone, Clobetasol, Mometasone वाली क्रीम तुरंत गोरा तो कर देती हैं, लेकिन अगर उनका बार-बार इस्तेमाल किया जाएगा तो वो परमानेंट स्किन थिनिंग, स्किन डैमेज और परमानेंट स्किन नेक्रोलाइसिस कर सकती है।

एक बार स्टेरॉयड से स्किन खराब हो गई तो उसे ठीक करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए आपने ऐसा काम कभी नहीं करना कि बिना किसी चमड़ी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के कोई भी लोकल स्टेरॉयड क्रीम इस्तेमाल नहीं करनी।

तो ये थी वो पांच गलतियां जो हम अक्सर करते हैं और हम अपनी मेलाज्मा को, पिगमेंटेशन को, डार्क सर्कल को, छाइयों को बढ़ा लेते हैं। यदि आप चाहते हैं आपकी स्किन अच्छी रहे, उसके अंदर पैच ना बने, हाइपर पिगमेंटेशन ना हो, मेलाज्मा से आप बचे रहें, आपकी स्किन सुंदर दिखे तो आप ये गलतियां भूलकर भी मत कीजिए।

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